
टनकपुर (चम्पावत)। दयानंद इंटर कॉलेज में बड़ी धूमधाम से महर्षि दयानंद जी की 202 वीं जयंती मनाई गयीं।महर्षि दयानंद सरस्वती जी एक महान समाज सुधारक, आर्यसमाज के संस्थापक थे। उनके बचपन का नाम मूल शंकर था। इनका जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात में हुआ था। महर्षि दयानंद सरस्वती जी का जीवन हमें सत्य,धर्म और समाज सुधारक की राह पर चलने की प्रेरणा देता है।” *कृण्वन्तो विश्वमार्यम्”*अर्थात पूरे विश्व को श्रेष्ठ बनाओ यही उनका संदेश था।विद्यालय की सम्मानित प्रधानाचार्या श्रीमती माहेश्वरी पांडे जी के द्वारा महर्षि दयानंद सरस्वती जी के जीवन पर प्रकाश डाला गया तथा बच्चों के द्वारा कविताएं – *गर्व हमें है कि हम उस दयानंद के अनुयायी हैं, उनके ही नाम से सुशोभित इस विद्या मंदिर के राही है, हमारे विद्यालय का नाम उनकी कीर्ति की गाथा है, उनके चरणों में झुकता हम सभी शिष्यों का माथा है* प्रस्तुत की गई । इसी के साथ भाषण,गीत प्रस्तुत किए गए। यह शब्द है स्वामी दयानंद सरस्वती जी के जिनसे हमने प्रेरणा ली है इन शब्दों को बच्चे बच्चे तक पहुँचाएंगे अब लक्ष्य हमने चुन लिया लौटो वेदों की ओर नारा फिर हम गुन जाएंगें अब हम फिर भारत को आर्यावर्त बनाएंगेस्वामी दयानंद जी के द्वारा *सत्यार्थ प्रकाश* पुस्तक की रचना की गई जिसमें मानव के उत्तम चरित्र के मार्ग को दर्शाया गया है। यह दिन महिला शिक्षा ,सामाजिक सुधारों और जाति भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष को याद दिलाने के लिए मनाया जाता है। इसी मौके पर समस्त शिक्षक शिक्षिकाएं भी उपस्थित रहे।


