
चम्पावत। जनपद में दो दिन पूर्व नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के चर्चित मामले में अब बड़ा ट्विस्ट सामने आया है। शुरुआती तौर पर जिस घटना ने पूरे जिले में आक्रोश पैदा कर दिया था, उसी मामले में पुलिस की विवेचना ने कई ऐसे तथ्य उजागर किए हैं, जिनसे कथित गैंगरेप की कहानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस अधीक्षक रेखा यादव के निर्देशन में गठित एसआईटी की जांच में दावा किया गया है कि यह मामला बदले की भावना से रचा गया एक सुनियोजित षड्यंत्र हो सकता है।
घटना 05 मई की रात की बताई गई थी, जिसमें 16 वर्षीय नाबालिग के साथ तीन लोगों द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था। शिकायत मिलते ही पुलिस ने बिना देरी किए पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 सदस्यीय एसआईटी गठित कर दी।
एसपी खुद पहुंचीं घटनास्थल…
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसपी रेखा यादव स्वयं घटनास्थल पहुंचीं। पीड़िता से बातचीत की गई, स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई गई और वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू कराई गई। आरएफएसएल टीम को मौके पर बुलाकर फॉरेंसिक परीक्षण कराया गया, जबकि पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, काउंसिलिंग और न्यायालय में बयान भी तत्काल कराए गए।
पुलिस ने दावा किया है कि जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया गया।
तकनीकी जांच में बदला घटनाक्रम…
पुलिस कप्तान ने बताया विवेचना के दौरान सामने आया कि नाबालिग, कथित घटना वाले दिन ग्राम सल्ली में आयोजित एक विवाह समारोह में अपनी इच्छा से अपने दोस्त के साथ गई थी।
पुलिस के अनुसार, मेडिकल रिपोर्ट में किसी प्रकार के संघर्ष, चोट या जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत नहीं मिले। वहीं कुछ गवाहों के बयान तकनीकी साक्ष्यों से मेल नहीं खाते पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि कमल रावत, पीड़िता और उसकी महिला मित्र के बीच घटना की तिथि पर लगातार संपर्क हुआ था। पुलिस इसे पूरे घटनाक्रम की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है।
सबसे अहम बात यह बताई गई कि नामजद तीनों आरोपी विनोद सिंह रावत, नवीन सिंह रावत और पूरन सिंह रावत कथित घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं थे। पुलिस का दावा है कि यह तथ्य गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों दोनों से पुष्ट हुआ है।
“बदले की भावना से रचा गया षड्यंत्र”…
पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि कमल रावत द्वारा व्यक्तिगत रंजिश के चलते नाबालिग को बहला-फुसलाकर पूरा घटनाक्रम रचा गया। हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच अभी जारी है तथा किसी भी निष्कर्ष पर अंतिम रूप से पहुंचने से पहले हर पहलू का परीक्षण किया जा रहा है।
झूठे आरोपों पर भी होगी कार्रवाई…
चम्पावत पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिला एवं बाल अपराधों के प्रति “Zero Tolerance” नीति अपनाई जाती है, लेकिन यदि जांच में आरोप मनगढ़ंत या भ्रामक पाए जाते हैं तो संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
पुलिस ने आमजन और मीडिया से अपील की है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए केवल सत्यापित तथ्यों का ही प्रसारण और प्रकाशन किया जाए।


