
टनकपुर (चम्पावत)। कुमाऊं में सातू-आठू यानि गौरा पर्व मनाया जाता है। शिव-पार्वती की उपासना का ये पर्व ख़ासतौर से महिलाएं करती हैं। इस परंपरा की शुरुआत करी जाती है बीरूड़ (पांच प्रकार का अनाज) भगा कर। भाद्र माह के पंचमी को बीरूड़ भिगाये जाते है, बिरुड़े का अर्थ उन पांच या सात तरह के भीगे हुए अंकुरित अनाज से है। बिरुड़ पंचमी के दिन एक साफ तांबे के बर्तन में पांच या सात तरह के अनाज को मंदिर के पास भिगोकर रखा जाता है. भिगोये जाने वाले अनाज मक्का, गेहूं, गहत , ग्रूस(गुरुस), चना, मटर और कलों हैं, तांबे या पीतल के बर्तन को साफ़ कर उसमें धारे अथवा नौले का शुद्ध पानी भरा जाता है. बर्तन के चारों ओर नौ या ग्यारह छोटी-छोटी आकृतियां बनाई जाती हैं ये आकृतियां गोबर से बनती हैं, गोबर से बनी इन आकृति में दूब डोबी जाती है।सातू-आठू पर्व भाद्र महीने की पंचमी से शुरू होता है और पूरे हफ्ते भर चलता है, महिलाएं इस पर्व में शिव-पार्वती के जीवन पर आधारित लोक गीतों पर नाचती-गाती और खेल लगाती हैं। इस पर्व में शिव-पार्वती की जीवन लीला का प्रदर्शन करते है, और कहते हैं कि जब पार्वती भगवान शिव से नाराज होकर मायके आतीं हैं तो शिवजी उन्हें वापस लेने धरती पर आते हैं, घर वापसी के इसी मौके को यहां गौरा देवी के विदाई के रूप में मनाया जाता है। स्थानीय लोग इसे प्रकृति से जुड़ा पर्व भी मानते हैं।इसी क्रम में नारी शक्ति सेवा समिति की महिलाओं द्वारा कर्मचारी कॉलोनी वार्ड नंबर 6 में नारी शक्ति सेवा समिति की अध्यक्ष दीपा धानिक के नेतृत्व में गौरा पर्व धूमधाम से मनाया गया तथा शिव पार्वती का डोला निकाला गया तथा टनकपुर तहसील रोड मैं स्थित शनि मंदिर में डोला लाकर उसका विसर्जन किया गया।महिलाओं ने शिव पार्वती केडोला यात्रा में से माँ पार्वती के जयकारे लगाये, उसके पश्चात् प्रसाद वितरण किया गया।डोला यात्रा में कमला जोशी, आशा साह, गीता जोशी, देवकी डपोटी,नीमा भण्डारी, सरस्वती जोशी, रेखा रौतेला, देवकी रौतेला,अंकिता जोशी, सीमा नेगी, राधा बिष्ट, सीमा जोशी, कविता चौधरी, लता पांडेय, प्रिया नेगी, ऊषा जोशी, देवकी पाटनी, रजनी जोशी, जानकी मैहर , सपना पाटनी, चंद्रकला जोशी,अनिता भट्ट, अनीता चौहान, तनुजा बिष्ट, उमा जोशी, शशि वर्मा, तनुजा जोशी, गोदावरी नेगी, गीता बोरा, महेन्द्री देवी,लीला जोशी, रेखा बिष्ट, आशा मेहर आदि महिलाएं उपस्थित रहीं।


