भारतीय ज्ञान परंपरा से राष्ट्र चेतना तक : भारत उत्थान न्यास ने जगाई सामाजिक परिवर्तन की अलख।डायट लोहाघाट में वैचारिक मंथन, पंचकोश दर्शन, सांस्कृतिक मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण पर हुआ सार्थक संवाद

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चम्पावत। राष्ट्र की उन्नति का आधार केवल भौतिक संसाधन नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक, सशक्त समाज और समृद्ध सांस्कृतिक चेतना है। इसी विचार को केंद्र में रखते हुए भारत उत्थान न्यास के तत्वावधान में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), लोहाघाट में विचार गोष्ठी आयोजित की गई। गोष्ठी में भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचकोश दर्शन, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विमर्श हुआ।भारत उत्थान न्यास के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र उपाध्याय ने न्यास की वैचारिक पृष्ठभूमि एवं उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय चिंतन मनुष्य को केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि परिवार, समाज, प्रकृति और राष्ट्र से जुड़ी समग्र इकाई के रूप में देखता है। पंचकोश दर्शन व्यक्ति के शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, बौद्धिक एवं आनंदमय विकास की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि संवेदनशील, संस्कारवान और उत्तरदायी नागरिकों का निर्माण भी होना चाहिए।पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित किए बिना विकास की कल्पना अधूरी है। जल, जंगल और जमीन का संरक्षण, स्थानीय संसाधनों का संवर्धन तथा विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना आज की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में भारत उत्थान न्यास की भूमिका को भी रेखांकित किया। प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र उपाध्याय ने सभी से इस महान कार्य से जुड़ने का आह्वाहन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण, युवाओं को सही राह दिखाने, उनको सद्मार्ग में चलने, युवाओं के चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे भारत उत्थान न्यास से जुड़कर राष्ट्रसेवा एवं देशसेवा में अपना योगदान देने हेतु बढ़-चढ़कर इस राष्ट्रव्यापी अभियान का हिस्सा बनें। डायट प्राचार्य दिनेश सिंह खेतवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समाज और राष्ट्र के विकास में प्रत्येक व्यक्ति की सकारात्मक सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने उपस्थित शिक्षाविदों एवं विद्यार्थियों से अपने ज्ञान, अनुभव और सामर्थ्य का उपयोग सामाजिक उत्थान के लिए करने का आह्वान किया।गोष्ठी में वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक एवं मानवीय दृष्टि, शिक्षा में नैतिक मूल्यों के समावेश और युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने की आवश्यकता पर विचार रखे।इस अवसर पर डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव, डॉ. कमल गहतोड़ी, डॉ. अवनीश कुमार शर्मा, डॉ. दिनेश सोराड़ी, शिवराज सिंह तड़ागी, राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय, विदुषी सक्सेना, रवीश पचौली, रंजीत सिंह राणा, राखी गहतोड़ी, भूपेंद्र सिंह देव, पूनम, इन्द्रा मेहता, त्रिपाठी, शीला जोशी, चन्द्र सिंह सामंत सहित अनेक शिक्षाविद एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।गोष्ठी का निष्कर्ष रहा कि भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्यों, समग्र व्यक्तित्व विकास और प्रकृति के संरक्षण को अपनाकर ही विकसित, संस्कारित एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र की मजबूत नींव रखी जा सकती है।फोटो- भारतीय ज्ञान परंपरा, पंचकोश दर्शन और राष्ट्र उत्थान के संकल्प पर अपने विचार रखते भारत उत्थान न्यास के उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश चन्द्र उपाध्याय।

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