
लोहाघाट। संस्कृत को केवल कक्षा-कक्ष की पढ़ाई तक सीमित न रखकर मंचीय अभिव्यक्ति से जोड़ने की पहल लोहाघाट में आयोजित विकासखंड स्तरीय संस्कृत प्रतियोगिता में देखने को मिली।
जीजीआईसी लोहाघाट में आयोजित प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने श्लोकोच्चारण, नाटक, वाद-विवाद, समूहगान, समूह नृत्य सहित विभिन्न विधाओं में प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और संस्कृत में प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के तत्वावधान में आयोजित प्रतियोगिता के कनिष्ठ वर्ग का शुभारंभ व्यापार संघ अध्यक्ष मनीष जुकरिया, उपाध्यक्ष दानू सुतेड़ी, प्रधानाचार्या एवं स्थल संयोजक नीलम देव तथा प्रधानाचार्य हरीश चंद्र कलौनी ने संयुक्त रूप से किया।
अतिथियों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए संस्कृत को अध्ययन के साथ-साथ व्यवहार और संवाद से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि मनीष जुकरिया ने कहा कि किसी भी भाषा को व्यापक स्तर पर स्थापित करने के लिए उसके नियमित प्रयोग को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए विद्यालयों में ऐसे मंच तैयार किए जाने चाहिए, जहां विद्यार्थी भाषा का प्रयोग करते हुए अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर सकें।
कार्यक्रम में खंड संयोजक राजू शंकर जोशी एवं पूर्व खंड संयोजक भगवान जोशी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन राजू शंकर जोशी एवं प्रकाश चंद्र उपाध्याय ने किया।
विभिन्न विधाओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभाप्रतियोगिता के पहले दिन कनिष्ठ वर्ग के विद्यार्थियों की विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा में संवाद, अभिनय और विचारों की प्रस्तुति के माध्यम से अपनी रचनात्मक क्षमता का परिचय दिया।
नाटक एवं समूह प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों ने भाषा के साथ अभिनय और मंच संचालन का बेहतर समन्वय दिखाया। वहीं वाद-विवाद और आशुभाषण में प्रतिभागियों ने संस्कृत में अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के दौरान विद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल बना रहा।प्रतिभागियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन निर्णायक मंडल द्वारा किया गया। कई प्रस्तुतियों में प्रतिभागियों के बीच अंतर कम होने के कारण परिणाम तय करना चुनौतीपूर्ण रहा। प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कृत के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ ही उन्हें भाषा के व्यावहारिक प्रयोग के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
निर्णयन में इनका रहा योगदानप्रतियोगिताओं के निर्णयन एवं अभिलेखीकरण में डॉ. अवनीश शर्मा, पूजा शाह, ललित मोहन, देवकी देवी, प्रकाश चंद्र उपाध्याय, सुभाष गोस्वामी, भगवती प्रसाद, गीता पंत, बसंत बल्लभ चौबे, हरिहर भट्ट, दीपक चौबे और नीता लोहानी सहित अन्य लोगों ने सहयोग किया।आयोजकों के अनुसार, इस तरह की प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृत के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने का अवसर मिलता है। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यह भी दर्शाया कि उचित मंच और अवसर मिलने पर नई पीढ़ी में संस्कृत के प्रति रुचि को बढ़ावा दिया जा सकता है।



