
टनकपुर। ग्राम प्रधानों की विभिन्न समस्याओं एवं दस सूत्रीय मांगों को लेकर प्रधान संगठन ने सरकार के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। संगठन ने मांगें पूरी होने तक ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले सरकारी कार्यक्रमों एवं खुली बैठकों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। वहीं प्रदेश स्तरीय प्रधान संगठन की ओर से 28 सितंबर से देहरादून में आंदोलन किया जा रहा है।
प्रधान संगठन का कहना है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को धरातल पर उतारने में ग्राम प्रधानों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन लंबे समय से उनकी विभिन्न मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी के चलते संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
प्रधानों की प्रमुख मांगों में ग्राम प्रधानों का मानदेय बढ़ाया जाना, प्रधानों का बीमा कराया जाना तथा मनरेगा सहित अन्य कार्यों में लगे मजदूरों का पारिश्रमिक 300 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन किया जाना शामिल है। इसके साथ ही ग्राम प्रधानों पर लागू ऑफलाइन उपस्थिति की बाध्यता समाप्त करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।
संगठन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्राम प्रधान लगातार जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी जायज मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।
प्रधान संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक दस सूत्रीय मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी कार्यक्रमों एवं खुली बैठकों का बहिष्कार जारी रहेगा। संगठन ने सरकार से मांगों पर शीघ्र वार्ता कर समाधान निकालने की अपील की है।
इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष प्रमिला ज्याल, तहसील अध्यक्ष राधिका चंद, मण्डलीय महामंत्री कुमाऊं इंद्रदेव विश्वकर्मा, कविता पचौली, गीता चंद, सरोज देवी, कंचन देवी, ललिता खत्री, शहाना खातून, निर्मला देवी, दीपक पचौली, हरीश लापड़, योगेश चंद, प्रेम सिंह ज्याला, प्रकाश राय, राजेंद्र कुमार सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।



